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News & Events » खनिज एवं पदार्थ प्रौद्योगिकी संस्था न में हिन्दी पखवाड़ा समारोह -2015


खनिज एवं पदार्थ प्रौद्योगिकी संस्था न में हिन्दी पखवाड़ा समारोह 1 से 15 सितम्बार, 2015

खनिज एवं पदार्थ प्रौद्योगिकी संस्थारन के राजभाषा प्रकोष्ठे ने हिन्दील पखवाड़ा समारोह 1 से 14 सितम्बरर, 2015 के दौरान बड़ी धूमधाम एवं राष्ट्री य गरिमा के साथ मनाया । इस समारोह के आयोजन के लिए श्री देवव्रत सिंह, वैज्ञानिक को संयोजक के रूप में नामित किया गया । इस पखवाड़े के दौरान संस्थािन के शोध छात्र, कर्मचारियों एवं उनके बच्चों के लिए हिन्दी। में विभिन्नद प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं ।

कर्मचारियों के बच्चोंय के लिए कविता पाठ एवं निबन्धे प्रतियोगिता आयोजित की गई । उपर्युक्तो प्रतियोगिताओं में लगभग 50 बच्चोंप ने बड़े उत्साोह के साथ भाग लिया । कर्मचारियों के लिए निबंध प्रतियोगिता, राजभाषा व टिप्पठण-प्रारूपण प्रतियोगिता, आशु भाषण प्रतियोगिता एवं हिन्दीब कविता पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया । प्रतियोगिताओं में पिछले वर्षों की तुलना में प्रतिभागियों की संख्यां में वृद्धि हुई । यह बढ़ोतरी संस्था न में राजभाषा की प्रगति का संतोषजनक सूचक है। .

हिन्दीत पखवाड़ा समापन समारोह एवं पुरस्का र वितरण समारोह 14 सितम्बकर, 2015 को अपराह्न 4.30 बजे संस्था न के सम्मेिलन कक्ष में आयोजित किया गया । प्रो. बी. के. मिश्र, निदेशक ने इस समारोह की अध्यजक्षता की । उन्हों ने अपने अध्यनक्षीय भाषण में राजभाषा के स्वहरूप, इसके महत्वइ तथा इसकी नीति एवं अनुपालन के प्रति हमारी जिम्मेेदारी का उल्ले ख किया । हाल ही में भोपाल में आयोजित 10 वीं विश्वन हिन्दीर सम्मेमलन के बारे में भी चर्चा करते हुए निदेशक महोदय ने पूरे विश्व की भाषाओं में से हिन्दी की उपयोगिता की दृष्टिकोण से सर्वोच्चं तीन प्रमुख भाषाओं में से एक है । उन्होंाने अपने सारगर्भित भाषण में विज्ञान के प्रचार एवं प्रसार में हिन्दी की भूमिका के महत्व् है से लोगों को अवगत कराते हुए कहा कि हमें विज्ञान को प्रयोगशाला तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए बल्कि इसे जन जन तक पहुँचाने के लिए राजभाषा हिन्दी का उपयोग करना चाहिए ।

अध्य क्षीय भाषण के उपरांत माननीय मुख्य अतिथि श्री उपेन्द्रर प्रसाद नायक, सहायक महाप्रबंधक, भारतीय स्टैेट बैंक, स्था-नीय मुख्यय कार्यालय, भुवनेश्वपर ने मातृभाषा के महत्व्ाप् पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सभी तरह की उन्न,ति का मूल मंत्र मातृभाषा ही है क्योंदकि हम अपनी मातृभाषा में ही अपने मौलिक विचार स्पबष्ट‍ रूप से प्रकट कर सकते हैं । हिन्दीह एक सर्वग्राह्य भाषा है और इसे भारत के सभी प्रांतो के लोग आसानी से समझ जाते हैं । इसे कार्यालयीन प्रयोग के अतिरिक्तक अपने विचारों के आदान – प्रदान के लिए उपयोग करना चाहिए, तभी इसका व्यावपक प्रचार प्रसार होगा । विदेशों में भी हिन्दीे का बहुत तेजी से प्रचार-प्रसार हो रहा है और हिन्दी् अंतरराष्ट्री य भाषा का स्वेरूप ग्रहण कर ली है ।

तदुपरांत राजभाषा कर्यान्वसयन समिति के सचिव श्री टी वेंकट राजु ने संस्था्न में राजभाषा हिन्दीं की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुवत की । उन्हों ने कहा कि संस्थाभन में हिन्दी में काम करने के लिए सभी आधारभूत सुविधाएं यथा द्विभाषी प्रपत्र, हिन्दीट अग्रेषण पत्र तथा कम्यू कि टरों पर हिन्दीद सॉफ्टवेअर की उपलब्धिता के कारण हिन्दी में किए जा रहे कार्यों की मात्रा में वृद्धि हुई है । प्रशासन के कार्यों के अतिरिक्तए वैज्ञानिक एवं तकनीकी कार्यों में भी हिन्दीय का प्रयोग बढ़ रहा है । परियोजना रिपोर्ट के प्राक्काथन को अंग्रेजी के साथ साथ हिन्दी् में भी प्रेषित किए जा रहे हैं । संस्थानन की वेबसाइट द्वि‍भाषिक रूप में उपलब्धा है । संस्थांन के कई अनुभागों में कर्मचारीगण हिन्दीन में मूल रूप से कार्य कर रहे हैं। संस्था न में किए जा रहे अनुसंधान एवं विकास कार्यों को राजभाषा हिन्दी में जन मानस तक पहुँचाने के उद्देश्यथ से पिछले छह वर्षों से राजभाषा प्रकोष्ठक द्वारा गृह पत्रिका 'अभिव्यकक्ति' का प्रकाशन किया जा रहा है और अब तक इसके 13 अंक प्रकाशित हो चुके हैं ।

मुख्या अतिथि श्री उपेन्द्रह प्रसाद नायक एवं प्रो. बी. के. मिश्र, निदेशक के कर-कमलों से पुरस्कािर विजेताओं को प्रमाणपत्र एवं पुरस्कारर प्रदान किए गए । इस पखवाड़ा का आयोजन श्री देवव्रत सिंह, वैज्ञानिक ने बड़ी कुशलता से किया और उनके द्वारा धन्य वाद ज्ञापन के साथ उपस्थित जनों के करतल ध्व,नि के बीच समारोह सहर्ष सम्पनन्नय हुआ ।

 
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